Film Dhuaan Review
धुंआ एक शक्तिशाली और दिल को झंझोड़नेवाली फिल्म है। धुंआ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो खूंखार है, और उसी खतरनाक इंसान के दिल के किसी कोने में छिपे हुए बचपन के अधूरे प्यार को भी आपको मिलाता है। निर्देशक सुनील धर्माधिकारी ने इस फिल्म के द्वारा इंसान का एक और पेहलु भी दिखाया है जो समाज के लिए कुछ अलग, और अपनी निजी ज़िंदगी में कुछ अलग होता है। और हर इंसान में होता है। फिल्म का शीर्षक धुंआ फिल्म के लिए एकदम सटीक है। जो इस फिल्म के नायक की ज़िन्दगी की सच्ची प्रतिमा और उसके अंदर की आग को उजागर करता है। फिल्म की कहानी में एक गैंगस्टर (राजेश के. श्रीवास्तव ) अपनी काली दुनिया के भवंडर में एक दिन अचानक अपने बचपन के प्यार से मिलता है। और यही इस कहानी की शुरुआत होती है। यह मुलाक़ात सिर्फ मुलाक़ात नहीं रहती बल्कि एक यादगार लम्हा जीने को मजबूर करती है। न सिर्फ इस कहानी के नायक के लिए बल्कि हर उस शख्स के लिए जो इससे जुड़ा है दर्शक के रूप में। नायिका श्रद्धा जवलकर के मासूम और प्यारभरे किरदार से आप प्रभावित ज़रूर होंगे। उसके स्क्रीन पर या यु कहे की इस कहानी में आते ही मानो प्यार के पुराने जख्म फिर से ताज़े हो जाते है। दोनों किरदारों के बीच के सीन्स में गज़ब की केमिस्ट्री, इमोशंस और प्यार को महसूस किया जा सकता है। फिल्म के नायक राजेश ने अपने गैंगस्टर के किरदार में जान डाल दी है। उनका किरदार काफी हद तक रियलिटी के आस पास है। श्रद्धा जवलकर स्क्रीनपर अपनी एक अलग छाप छोड़ती है। उनकी अदाकारी काफी सराहनीय है। इस फिल्म की ताकद इस फिल्म का रीयलिस्टिक चित्रांकण है, जो अपने कैमरा में छायाचित्रकार अजय धामने ने बखूबी कैद किया है। फिल्म का एडिटिंग इमरान हुसैन का है। अपनी जम्प कट और स्मूथ एडिटिंग की वजह से आपको इस फिल्म में उलझाकर रखती है। फिल्म की निर्माता आसावरी नारकर ने इस स्क्रिप्ट को बनाने का निश्चय करके निर्देशक सुनील धर्माधिकारी को फ्रीहैण्ड दिया है जो की फिल्म में साफ़ साफ़ दिखाई देता है। निर्देशक पर किसी भी प्रकार का दबाव या किसी भी प्रकार की शर्ते नहीं रखी। इससे यह फिल्म पूरी तरह से कामयाब होते हुए दिखाई दे रही है। मीनिंगफुल और रीयलिस्टिक फिल्म देखनेवालों के लिए यह फिल्म एक दावत है।
